भारत सरकार डिजिटल विज्ञापन कर (Digital Advertisement Tax) को हटाने की योजना बना रही है। यह निर्णय विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण होगा जो डिजिटल प्लेटफार्मों पर विज्ञापन प्रदान करती हैं। सरकार का मानना है कि इससे डिजिटल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी कंपनियों द्वारा कर चुकाने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकेगा।
इस कदम का उद्देश्य भारत के डिजिटल विज्ञापन बाजार को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस निर्णय के बाद, भारत में स्थित कंपनियों और विज्ञापनदाताओं के लिए कर अनुपालन प्रक्रिया को आसान किया जाएगा, जिससे वे अपने व्यापार को अधिक आसानी से चला सकेंगे।
इसके अलावा, विदेशी कंपनियों को भी भारतीय बाजार में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
इस परिवर्तन से छोटे और मंझोले व्यवसायों को भी लाभ होगा क्योंकि वे अपने उत्पादों और सेवाओं के प्रचार के लिए कम खर्च कर सकेंगे।
यह कदम विभिन्न कंपनियों के लिए सकारात्मक परिणाम ला सकता है:
हालांकि यह कदम काफी फायदे के रूप में दिख सकता है, इसके कुछ नकरात्मक पहलू भी हो सकते हैं:
दिल्ली उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के घर से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद एक बड़ा विवाद उत्पन्न हो गया है। जांच के दौरान घर से लाखों रुपये की नगदी बरामद की गई, जिसके बाद न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। यह घटना पूरे न्यायिक क्षेत्र में सनसनी मचाने वाली है और इससे न्यायपालिका की स्वच्छता पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की पूरी जांच की जा रही है और न्यायाधीश को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना ने समाज के विभिन्न वर्गों में एक गंभीर बहस छेड़ दी है कि क्या न्यायपालिका में इस प्रकार के मामले सामान्य हो गए हैं?